राष्ट्र, राष्ट्रीयता और हिन्दुत्व: प्रमुख जन गोष्ठी ( गोंधीया - महाराष्ट्र ) दि ७.१२.२५
• अमेरिका 11 /9 आतंकवादी हमलों
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के तैं टावर ध्वस्त
अमेरीका स्तब्ध, सर्वत्र चर्चा: क्या हुआ? क्यों हुआ? कैसे हुआ? हम कौन?
Samuel Hungton met so many people discuused and write one book
"Who are we? "
" Multi state English speaking protastsnt culture is America"
Why to know our identity?
He said" unless and untill we decide our identity we can not decide our priority"
हमारे देश की , हमारी पहचान क्या?
जवाब आता है" हिंदू, हिन्दुस्तान, भारत"
• हम कहते है हिंदू राष्ट्र
प्रार्थना: हिंदू राष्ट्रांग भुता: हम हिंदू राष्ट्र के अंग भूत घटक है
हमारे यहां: राष्ट्र पुरुष की संकल्पना: हजारों हाथ, पैर, चक्षु
आत्मा एक है राष्ट्र की
पुरुष सूक्त: राष्ट्र पुरुष कहा है
दूसरे देश में यह कल्पना नहीं
"माता भूमि, पुत्रोंहम पृथिव्या" पृथु राजनक राज्य: पृथु
हम उनके पुत्र है, पृथ्वी माता है, सारी भूमि माता है
भूभाग नाम: भारत , भा= प्रकाश, पहले प्रकाश यह हुआ, ज्ञान में रात जो है वह भारत
• पहले मानव धर्म कह गया है।हिंदू शब्द कहसे आया: वेद, उपनिषद में है
यह नाम दूसरों दिया, भूभाग को हिंदुस्तान कहा
• विष्णु पुराण में कहा गया है-
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ।।
यानि समुद्र के उत्तर और हिमालय के दक्षिण में जो देश है उसे भारत, तथा
उनकी संतानों को भारती कहते हैं।
इसको भारत वर्ष कहा गया
• हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थान प्रचक्षते॥”- (बृहस्पति आगम)
अर्थात : हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।
• राष्ट्र क्या है?
• राष्ट्र और nation एक नहीं
• फ्रांस की क्रांति के बढ़ भाषा के साथ जुड़े देश को नेशन कहने लगे और कई जगह एक मजहब के के कारण नेशन बने। उदाहरण: जर्मन बोन वाले का नेशन जर्मन, फ्रेंच बोन वाले का नेशन फ्रांस, जापानीज़ बोलने वाले का जापान नेशन
• फिरभी वह एकता नहीं: ईसाई है लेकिन स्पेन और पुर्तगाल, आयरलैंड और इंग्लैंड, जर्मन और फ्रांस
• मुस्लिम होने के बाद भी पाकिस्तान से बंगलादेश अलग हुआ
• रिलीज़न मजहब के कारण नेशन बने: असहिष्णु, स्वार्थी, धर्मांतरण करने वाले जेहादी बने
•
राष्ट्र : हमारी अवधारणा अलग है
• हमारे लिए नेशन ही राष्ट्र नहीं
• अथर्ववेद में कहा है"। अथर्ववेद १९.४१.१ मंत्र है: "भद्रमिच्छन्त ऋषयः स्वर्विदस्तपो दीक्षामुपनिषेदुरग्रे। ततो राष्ट्रं बलमोजश्च जातं तदस्मै देवा उपसंनमन्तु।" यह मंत्र कल्याण की कामना करता है, जिसमें ऋषियों ने तपस्या और दीक्षा ग्रहण की, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्र, बल और ओज उत्पन्न हुआ। यह मंत्र देवताओं से प्रार्थना करता है कि वे इस राष्ट्र को अपना सम्मान और समर्थन दें।
• पदार्थान्वय:
• भद्रमिच्छन्त: कल्याण की इच्छा करते हुए।
• ऋषयः: ऋषि।
• स्वर्विदस्तपः: स्वर्विद् (स्वर्ग को जानने वाले) तप।
• दीक्षामुपनिषेदुरग्रे: दीक्षा ग्रहण करने के लिए एकत्रित हुए।
• ततः: उस (दीक्षा) से।
• राष्ट्रं बलमोजश्च जातं: राष्ट्र, बल और ओज उत्पन्न हुए।
• तदस्मै: उस (राष्ट्र) के लिए।
• देवा उपसंनमन्तु: देवताओं का सम्मान हो।
• मातृवत भूमि, पुत्रवत समाज और एक इतिहास, परंपरा, सुख दुख का भाव , समान शत्रु मित्र भाव और संस्कृति से राष्ट्र बंटाएं
देश , राष्ट्र, राज्य:
• देश भौगोलिक संकल्पना है, उनकी सरहद होती है, हर जीत के कारण वह छोटा बड़ा हो सकता है , उदाहरण: श्री लंका, जापान
• राज्य,: में व्यवस्था का नाम है, एकही देश और राष्ट्र में भी बदल शक्त है, और एक ही राष्ट्र में एक से जायद हो शक्त है उदय: पुराने भारत में कई राजा थे, राजशाही में से लोक शाही होना, लोकशाही से सारमुख्तूर शाही होना
• राष्ट्र: सांस्कृतिक संकल्पना। है, जो भूमि जन और संस्कृति से बनता है, उदाहरण भारत राष्ट्र, हिंदू राष्ट्र, यह बदलता नहीं चाहे सरहद या व्यवस्था में बदल हो। भारत में से कई भाग अलग हुए और राज्य व्यवस्था भी बदली लेकिन राष्ट्र एक रहा
• देश को हम शरीर के साथ, राज्य को बाहरी वस्त्रोके साथ और राष्ट्र को हम आत्मा के साथ तुलना कर सकते है
भारत एक राष्ट्र है, प्राचीन राष्ट्र है और हिन्दू राष्ट्र है
• नेशन : शब्द राष्ट्र का अर्थ नहीं हो सकता
• दूध, दही, मक्खन के पर्यायवाची शब्द है मिलके, curd, butter, किन्तु घी के लिए नहीं क्योंकि वह इसकी कल्पना ही नहीं, sari, dhoti, akhand सौभाग्यवती, punya जैसे शब्द ही नही
राष्ट्र नेशन:
1. No nation, राष्ट्र था ही नहीं, अंग्रेजों की बात, हमारे आने के बात हमने सबको एकत्रित किया एक नेशन बनाया
2. मल्टी नेशन : यह अनेक, भाषा,भोजन, रीति रिवाज, उत्सव वेश है, अनेक देश राष्ट है.India is subcontinent, india is union of republic, India is group of Seventeen nations
3. जवाहलाल नेहरू: we are nation in making , हम राष्ट्र बन रहे है, काफले आते गए, कारवां बसता गया
4. भारत एक राष्ट्र है, प्राचीन राष्ट्र है और हिन्दू राष्ट्र है
राष्ट्र हमारी बनने के लिए ज़मीन के बिना हो सकता है( इजरायल १९५८ पहले) ,एक भाषा भी जरूरी नहीं( भारत) एक भाषा वाले भी अलग राष्ट्र होते है
( इंग्लिश)
• स्वतंत्रता के पहले भी गुलामी समय में भी हिंदू राष्ट्र समाज के बीच जीता था
• कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी( यह बात राष्ट्रीयता)
• भारत राष्ट्र के बारे में भ्रम" मैक्समूलर" _" India is nation of philosophers and indian intellect is lacking in political and material speculation and that the Indian never knew the feeling of nationality "
• हम प्राचीन राष्ट्र है: यूनान मिश्र रूमा मिट गए जहासे
• अनेक भाषा बोली और पूजा पद्धति होने के बाद भी समान संस्कृति मूल्य के कारण हम एक राष्ट्र रहे( इजिप्ट मिश्र में फराह राजा, जर्मन बर्बर, पर्शियन, सिकंदर, अरब बदलते गए)
• हमारे यहां राष्ट्र की अवधारणा दार्शनिक है, अङ्ग है और अमित है। भाषा बोली संप्रदाय राकेश विविधता होते हुए भी नाचता को आने नहीं पहुंचती दर्शन के माध्यम से जुड़े हुए भारत में अंतर आत्मा ठीक है और यह दार्शनिक भाव लगातार चल रहा है
• हम मानते हैं कि दुनिया में एक भी हिंदू जिंदा है तब तक हिंदू राष्ट्र अमर है और हमारा राष्ट्र दर्शन हिंदू दर्शन की है
• हमारे यहां ऋषि-मुनियों ने भद्र इच्छा थी लोग मंगलकारी भावना विकसित
की , तप दृढ़ संकल्प परिश्रम करके साक्षात्कार किया और मूल्योकि स्थापना को वह राष्ट्र बना। यही भावना ऋषी मुनि।से लेकर राजा महाराजा विद्वान धनवान निर्धन ग्रामवासी नगर वासी तक पहुंची और एक आत्मा को बना
• वसुधेव कुटुंबकम, एकं सद विप्रा बहुधा वेदन्ती , आ नो भद्रा, सर्वे सुखिन संतु, आत्म वत सर्व भूतेषु : यह सब मौलिक सिद्धांत बने जो राष्ट्र की एकता के मूल है
• पूर्वोत्तर भारत में रहती 222 जनजाति बी हाल सर पी मां को पवित्र मानती है उनकी पूजा करती है सबके भले की कामना करती है और दूसरी कोई पूजा कर सकती कि निंदा नहीं करते। यही हमारा सच्चा राष्ट्र भर राष्ट्रीयता है जो हिंदुत्व ही है।
• विदेश में अध्ययन देशो में नेशन रिलिजन खुलासा और राज्य पर आधारित इसलिए नेशन बदल-बदल उथल पास सत्संग खोता रहता है और वह अर्थी को शासकीय नियंत्रण से मुक्त नहीं हो सकता
राष्ट्रीयता:
भारत की राष्ट्रीय का हिंदुत्व है
• महर्षिअरविंद ने कहा है कि "सनातन धर्म यही राष्ट्रीयता है"
Hey described jail was divine place for him.He said indian nationslism is not merely political movent but embodiment of Sanatan dharm। Rise and fall of ours is with sanatan dharma"
• डॉक्टर संपूर्णानंद जी ’ इमोशनल नेशनल इंटीग्रेशन कमिटी’ के अध्यक्ष
"भारत का कोई एक दर्शन होना चाहिए, जब तक हम दर्शन निश्चित नहीं कर सकते कब तक हम भावनात्मक एकता का निर्माण नहीं कर सकते और हमारा दर्शन हिंदू दर्शन है इसलिए हिंदुत्व ही हमारी राष्ट्रीयता है"
• अपने यहां हिन्दू दर्शन, वैदिक दर्शन और सनातन दर्शन एक ही है। हिंदुत्व के मुख्य बाते यह है
5. ईश्वर सर्व व्यापी है। एक ही परमात्मा है।
• ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् ।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ।।
(जड़-चेतन प्राणियों वाली यह समस्त सृष्टि परमात्मा से व्याप्त है। मनुष्य इसके पदार्थों का आवश्यकतानुसार भोग करे, परंतु ‘यह सब मेरा नहीं है के भाव के साथ’ उनका संग्रह न करे।)
• ईश्वर: सर्वभूतानां ( गीता १८.६)
• इसलिए यह संघर्ष नहीं है।
2. सबके अंदर एक ही ईश्वर विराजमान है। ।जड़ चेतन सभी जगह, इसलिए सब एक सामान है, कोई ऊपर नहीं कोई नीचे नहीं, कोई बड़ा नहीं कोई छोटा नहीं। " सम् म सर्वेश भूतेषु तिष्ठतम परमेश्वर" ( सब प्राणी में समानरूप हु) गीता १३.२७
3. सर्व मांगल्य का सिद्धांत :
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग् भवेत्।।
अर्थ: सर्वे भवन्तु सुखिनः: सभी सुखी हों। सर्वे सन्तु निरामया: सभी रोगमुक्त (स्वस्थ) रहें। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु: सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें ।
मा कश्चिद्दुःखभाग् भवेत्: कोई भी दुःख का भागी न बने।
4. सर्व जन समन्वय की प्रज्ञा:
सर्व जिनका समन्वय का सिद्धांत हमारे रिश्तों की विशेषता है इससे लिए यहां विवाद नहीं होता। बुद्धिमान लोगों में मतभेद ज्यादा होते हैं । परम तत्व और परम सत्य एक ही है ।उनके यहां जाने के रास्ते अलग अलग सकते हैं ।स्वामी विवेकानंद ने शिकागो प्रवचन में यही कहा था जैसे नदियां अलग-अलग स्थानों से निकलकर एक समुद्र की ओर जाती है वैसे सब समान है रास्ते अलग हे लेकिन गंतव्य एक ही है।
"इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुरथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान् ।
एकं सद् विप्राः बहुधा वदन्ति अग्निं यमं मातरिश्वानं आहुः ॥
यह ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध मंत्र है, जिसका अर्थ है कि एक ही सत्य है जिसे विद्वान लोग अलग-अलग नामों से पुकारते हैं। मंत्र बताता है कि इन्द्र, मित्र, वरुण, अग्नि, दिव्य, सुपर्ण, गरुत्मान, यम और मातरिश्वान जैसे कई नाम एक ही परमात्मा के हैं। यह श्लोक एकेश्वरवाद और सत्य की एकता पर जोर देता है, कि सभी मत और विभिन्न नामों से पुकारे जाने वाले देवता अंततः एक ही परम सत्य
के रूप हैं।
एकं सद् विप्राः बहुधा वदन्ति: इसका अर्थ है कि सत्य एक है, लेकिन ज्ञानी (विप्र) लोग उसे कई तरह के नामों से बोलते हैं।
इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहुः: उन्होंने (उस एक सत्य को) इन्द्र, मित्र, वरुण और अग्नि कहा है।
अथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान्: वह दिव्य, सुपर्ण और गरुत्मान भी है।
अग्निं यमं मातरिश्वानं आहुः: वे उसे अग्नि, यम और मातरिश्वान भी कहते हैं।
हिंदुत्व:
6. एकम सद् विप्रा: बहुधा वदंती
• स्वामी विवेकानंद शिकागो : (१)केवल सहिष्णुता नहीं (२)सभी मार्ग को सत्य मानना (३),सभी मार्ग का स्वीकार करना (४)संस्कृत में exclusive
2. विविधता के मूल में एकता की अनुभूति:
• रवींद्रनाथ ठाकुर अनेकता में एकता को देखना ,विविधता मे एक्य
3. प्रतीक व्यक्ति में ईश्वर का अंश है
• तीन पुरुष पशु पक्षी जीव जंतु वनस्पति सजीव निर्जीव सब में ईश्वर है
4. प्रतीक व्यक्ति को अपना पति का मार्ग चुनने के स्वतंत्रता
• In our country there is spiritual democracy ( आध्यात्मिक लोकतंत्र)
• जैसे भागीरथ सीखो गंगा कहने में मुश्किल नहीं है वैसे अपने देश में बना दर्शन जिनका चिंतन हुआ व्यवहार में आया और मुरली पर स्थापित से जिसको हम गीत संगीत पूजा भोजन साहित्य और माया उनको एक संस्कृति कहीं और उनको जानते इसलिए श्रुति हिंदुत्व है
• हिंदुत्व सनातन और वैदिक पर्यायवाची है
• कैसे हिंदू धर्म सनातन है वैसे हिंदू राष्ट्र अभी अति प्राचीन है दूरस्थ तो यहां था है और रहेगा हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है
• हम यहां कैसे हैं "माता भूमि: पुत्रोंह पृथिव्या:"
• हमारे यहां सब को साफ लेकर चलने की लगती है विश्व के कल्याण की भावना है
• हमारे यहां की दर्शन चिंतन मनन और साइड पर एक जैसी का ने हनी लोगों की यहां से सहाय जिनको हम उसी कैसे हैं
• हमारी सब चीजें प्राचीनतम ग्रंथों में संस्कृत है जिसमें कई चीजें शाश्वत जिनको श्रुति कैसे हैं और कहीं समय अनुसार बदलती रहती है जिनको श्रुति कहते है।
• हमरी यहां विविधता में एकता है यह पैसे से हे एकता का विधि से स्वरुप है भाषा बोली पूजन उत्सव विद संगीत अलग होते पर भी भाव जगत एक है। Uniformaity है pluralism नहीं।
• हमारे यहां जफर पशु पक्षी और पेड़ में देवत्व व देखते हैं और पूजा भी करते है।
• समुत्कर्ष और नि:श्रेयस का तालमेल है
• हमारी यहां चैतन्य की साधना है लेकिन जड़का कभी वो अवगणना नहीं है
• धर्म और विज्ञान साथ साथ चलते हैं
• विद्या और अविद्या स्पष्ट कल्पना है. विद्या का उपयोग जीवन के और और काम के लिए जरुरी भौतिक क्षमता के लिए है और विद्या का उपयोग जीवन का अंतिम लक्ष्य धर्म और मोक्ष के लिए है
• मेरी यहां विश्व कल्याण थी भावना है इसलिए राजा जनक मुक्ति गुरुदेव ने जो सिद्धांत बनाए हो विश्व कल्याण के थे आचार्य चाणक्य ने अर्थशास्त्र लिखा को सिर्फ मगध के लिए नहीं एक इन पुणे विश्व तेरे लिखा । Global market नहीं global village संकल्पना
• स्व से परमेष्टि तक की साधना है
• पर्यावरण कक्षा के लिए पृथ्वी सूक्त बताया G 20 one earth one family
• भारत माता कहती गई। राष्ट्र को विराट पुरुष कहा गया।
• हम चीर पुरातन लेकिन नित्य नूतन है
7. दादा धर्माधिकारी कैसे थे हिंदूत्व स्टेशनरी की दुकान जैसा है जहां कागज फैन पेंसिल मिलती है स्टेशनरी नाम की कोई चीज नहीं होती
8. हमारे यहां स्वयं पर श्रद्ध रखते हैं और अन्य की श्रद्धा का सम्मान करते हैं
9. हम अपनी पूर्ण स्वतंत्रता रखते हैं लेकिन दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा अभी करना चाहते हैं
10. हिंदुत्व का दृश्य स्वरुप हिंदू संस्कृति है
11. हिंदुत्व के विचारों वाले व्यक्ति के साथ दुनिया भर के कोई लोग आनंद से रह सकते हैं
12. हमारा विचार विशाल वह तो वर्कशॉप पेश समान है जिसकी छाया में सबको सुख मिलता है
13. हमारा विचार विश्व पर आधिपत्य यार सता जमाना कभी नहीं रहा
14. अहम ब्रह्मास्मी, सर्व खालिदा ब्रह्म, तत्वमसी
राष्ट्र का हिन्दू होना याने क्या?
• भारत की पहचान: स्वभाव, अधिष्ठान धर्म है( जोड़ना, कर्तव्य पालन, में से हम की ओर जाना)
• इसको दुनिया में हिंदुत्व कहते है
• भारतीय समाज= भारत राष्ट्र= हिंदू राष्ट्र
• ऐसा राष्ट्र है, उन्हें बनाए रखना, व्यक्ति, परिवार, व्यवसाय, सामाजिक जीवन में इसकी अभिव्यक्ति हो, आचरण में लाए। ऐसे हिन्दू राष्ट्र पनता है।
• यही प्रवाह चलता रहे, उनका सम्मान हो, यही ही सभी में हिन्दू राष्ट्र होना समझे
• हमारे पूर्वज, साधु संत, सन्यासी, सुधारक,लोगों ने संघर्ष करके भी किया है।
• यह जहां हुआ ऐसे भूमि को मातृ भूमि कहना और इसकी भक्ति करना ही हिन्दू होना है।
• " सर्व सुखिन संतु, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मा कश्चित दुख:भाव भवेत्_ सबके सुख की गारंटी धर्म है।
राष्ट्रीय होना याने क्या?
• भारत का समाज एक है, मेरा अपना है, यह कर्तव्य भावसे होते देना, विचार और आचरण राष्ट्रीय होना है
• यही राष्ट्रीय होना , यही ही हिन्दू होना, है और ऐसा करनेवाला हिंदू है, ऐसे यह हिंदू राष्ट्र है
• दुनियामे भाषा, वंश, उपासना का वैविध्य है, इसमें भी एकता दिखना, याने की सबके सुक्खी कामना करना हमारी नियति है और कर्तव्य भाई।
उदाहरण: वसुदैव कुटुमकम, विश्वम भवत्येक नीडम।
• विश्वको ऐसा बनाना यह कार्य विश्व गुरु बनाना, यह कर्म संघ करता है।
• RSS is evolution of life mission of Hindu nation( RSS हिंदू राष्ट्र के जीवन मिशन का विकास है)
• यह हिंदू राष्ट्र और समाज को उनका दायित्व पूर्ण करना, सक्षम बनाना यह संघ कार्य है।
• હિન્દુત્વ નું સ્વાભાવિક પ્રકટી કરણ:
(૧) રાષ્ટ્ર ગર્વ વાક્યો: થી
ઉદાહરણ તરીકે सत्यमेव जयते, योगक्षेम वहम्यम, शं नो वरुण:
सत्यम शिवम सुंदरम ક્યાંથી? ઉપનિષદ હિન્દુ શાસ્ત્રો
(૨) પરમવીર ચક્ર ડિઝાઇન: સાવિત્રી વિક્રંમ ખાનોલકર( હંગેરિયન માં, રશિયન પિતા): ડિઝાઇન માં શું? ઇન્દ્રનું વજ્ર, ભવાની તલવાર? કેમ?
(૩) ૧૯૫૭ કેરળ મુખ્ય મંત્રી EMS નાંબુદ્રિપાદ: ચીન મા ઉતસે તુંગ મળવા, નટરાજ મૂર્તિ ભેટ
(૪) પ્રજાસત્તાક સુવર્ણ જયંતિ વર્ષ: ટપાલ ટિકિટ: સંસદ ભવન ડોમ શ્લોક
सभा वा न प्रवेष्टया, वक्तव्यं वा समंजसम्।
अब्रुवन विब्रुवन वापि, नरो भवति किल्विषी
હિન્દુત્વ ની સમાજ, સમાજ તરફની ફરજ, નાસ્તિક ને પણ લાગુ
પંડિત નેહરુ Autobiography: Hinduism clings to its children despite them
હિન્દુત્વ અને ભારતીયત્વ:
સંઘ માં બને શબ્દ વપરાય છે
શબ્દાર્થ_ analysis મહત્વ
Salt general term in kitchen,/in laboratory
General /specific
ભારત ભૌગોલિક અર્થ, હિન્દુ સામાજિક અર્થ
હિન્દુત્વ ની વિકાસ ક્યાં? ભારત માં? ક્યાં સમાજ દ્વારા? હિન્દુ
ઉદાહરણ: ઉપનિષદ; આરણ્યક: જંગલોમાં બન્યા: કોણ દ્વારા? ઋષિઓ
ઉદાહરણ: મૈથિલી, જાનકી, સીતા
હિન્દુત્વ ના ગુણધર્મો:
• ખુલ્લાપણું: આ નો ભદ્રા ( નેહરુ ગુરુજી: તમે સંકુચિત, બરી દરવાજા ખુલ્લા, પણ દિવાલ છત ના પડવા દેવાય)
• બધાનો સમાવેશ( પંથ સંપ્રદાય, પૂજા પદ્ધતિ)
• સીમા નહિ
• ગીતા: विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।।
• પ્રસાર પ્રચાર પણ હિંસા નહિ
• માતૃ દેવો, પિતૃ દેવો, આચાર્ય દેવો, અતિથિ દેવો ભવ
• त्यजदेकम कुल स्यार्थे,ग्राम स्यार्थें कुलम त्यजेत
ग्रामम जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिव्या त्यजे
• रुचीनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम्।
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव॥
• मातृवत् परदारेषु, परद्रव्येषु लोष्ठवत्।
आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति सः पण्डितः
• માતૃભાવ: ગૌમાતા, તુલસી માતાં, ભૂમિ માતા, લોકમાતા
• પુનઃ જન્મ, કારમાં સિદ્ધાંત
• ધર જતા ધરમ પલટતા
• ઘડવૈયા મારે ઠાકોરજી નથીથાવું
આજના સમયમાં હિન્દુત્વ સુસંગતતા, પ્રસંગિક્તા
આશરો
Human rights: ૧૯૪૮ UNO declaration article ૧૪ વૈશ્વિક અધિકાર: જૂલમથી મૂકતા થવું અને આશ્રય મેળવવો
• ૬૮BC Rome દ્વારા ભગડાયેલા યહૂદી ભારતમાં આશરો
• ૪ સદી Cranite Christian આશરો
• ૮ મી સદી પારસી ને આશરો
• બીજા વિશ્વ યુદ્ધ જામનગર જામસિંહ પોલેન્ડ વાસી ને રાખ્યા
• મહનારાયન ઉપનિષદ્ માં : યત્ર વિશ્વ ભવતિ નીડમ
• World global village નહીં global family, G૨૦
પર્યાવરણ:
• ગ્લોબલ વોર્મિંગ સેમિટિક વિચાર
• ઇકો ફ્રેન્ડલી નહિ ઇકો બ્રધરલી
• ભર્તું હરિ વૈરાગ્ય શતક: माता मेदिनी तात मरुत
सखे तेज:सुबंधोजल
भ्रात व्योम निबध्ध एवं
भवता मनय: प्राणा माजकी
• હિન્દુત્વ વિરોધી કોઈ નહિ ઉદા: શિવાજી અફઝલખન ધર્મના વિરૂદ્ધ, કૃષ્ણ અર્જુન કર્ણ
હિન્દુત્વ:
• અભિમન્યુ મૃતદેહ લતો નહિ, રાવણ પાસે શીખવા લક્ષ્મણ જાય
• હિન્દુત્વ communalism, પ્રતિગમી નહિ, ભાગલાવાદી નહિ, લઘુમતી વિરોધી નહિ, સોફ્ટ હાર્ડ નહિ
• આજે તો પુસ્તક લખાય છે: why I am Hindu: shadhi tharuru Why I am not a Hindu: Kaya ilahi
• I am Hindu by accident
• Radhakrishnan book: Hindu view of life
Hindu ism નહિ ( capitalism, communalism, socialism


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