रायगढ दुर्ग( छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी)





























भारत के महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले में महाड के पास सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित एक ऐतिहासिक और बेहद मजबूत पहाड़ी दुर्ग है। यह केवल एक संरचना नहीं है, बल्कि मराठा साम्राज्य के शौर्य, स्वाभिमान और गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक है।

रायगढ़ किले की मुख्य जानकारी

 मराठा साम्राज्य की राजधानी: छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1674 में रायगढ़ को अपने बढ़ते साम्राज्य की आधिकारिक राजधानी बनाया था।

 भौगोलिक स्थिति: यह किला समुद्र तल से लगभग 820 मीटर (2,700 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर गहरी खाइयों और खड़ी चट्टानों से घिरे होने के कारण इस पर कब्जा करना दुश्मनों के लिए लगभग असंभव था।

 स्थापत्य कला (Architecture): शिवाजी महाराज के प्रमुख वास्तुकार हीरोजी इंदुलकर ने इस किले का निर्माण और विस्तार करवाया था। मुख्य किले तक पहुँचने के लिए लगभग 1,400-1,450 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं (हालांकि अब यहाँ रोपवे की सुविधा भी है)।

ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व

1. छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक

6 जून 1674 को इसी किले पर छत्रपति शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक राज्याभिषेक हुआ था, जहाँ उन्होंने 'छत्रपति' की उपाधि धारण की और हिंदवी स्वराज्य की नींव को संस्थागत रूप दिया।

2. अभेद्य दुर्ग (Gibraltar of the East)

भौगोलिक बनावट के कारण अंग्रेज इसे "पूर्व का जिब्राल्टर" कहते थे। किले के तीन तरफ खड़ी चट्टानें हैं, जिससे केवल एक ही मार्ग से ऊपर आया जा सकता था। दुश्मन अगर नीचे खड़ा भी हो, तो वह ऊपर नहीं देख सकता था।

3. प्रमुख दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थल

  • राजसभा (King's Court): यहाँ शिवाजी महाराज का भव्य सिंहासन स्थित था। इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि राजसभा के मुख्य द्वार से फुसफुसाहट भी सिंहासन तक साफ सुनाई देती थी
  • नगाड़खाना (Nagarkhana): मुख्य दरबार के सामने बना यह विशाल शाही प्रवेश द्वार वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है।
  • टकमक टोक (Takmak Tok): यह एक 1,200 फीट गहरी सीधी खाई वाला किनारा है, जहाँ से अपराधियों को नीचे फेंककर मृत्युदंड दिया जाता था
  • जगदीश्वर मंदिर और समाधि: किले पर भगवान शिव का प्रसिद्ध जगदीश्वर मंदिर है। इसी परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि भी बनी हुई है, जो हर राष्ट्रप्रेमी के लिए एक तीर्थ स्थल की तरह है।
  • हिरकणी वाडी (Hirkani Bastion): एक साहसी माँ 'हिरकणी' की याद में बना बुर्ज, जिसने अपने बच्चे के लिए रात के अंधेरे में किले की सीधी और खतरनाक चट्टान को उतर पार किया था। शिवाजी महाराज ने उसके इस साहस का सम्मान करते हुए इस बुर्ज का निर्माण कराया।


 



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