चरित्र विर्माणमे शिक्षाकी अवधारणा- सोमनाथ युनि। दि ४.८.२६



 सोमनाथ यूनिवर्सिटी और मालवीया मिशन द्वारा आयोजित परिसंवाद- 

             दिनांक 4 अगस्त 2024 मंगलवार

      चरित्र :  व्यक्ति में नैतिक गुण के विचार, आचरण , व्यवहार करनेसे पहचान बनती है वह चरित्र उनका चरित्र है।

             चरित्र गलत आचरण गलत और   चरित्र सही आचरण सही होता है। चरित्र ही जीवन है।

       विवेकानंद : "हम जो कुछ सोचते हैं वह हमारे विचार बनते हैं ,  विचार से कर्म  बनते हैं ,   कर्म बार-बार दोहराने से चरित्र बनता है । चरित्र प्रदर्शित करते उदाहरण.   उदाहरण शील: प्रहलाद द्वारा इंद्र को देना . शील के साथ धर्म, न्याय, लक्ष्मी जाती है ।

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गलत  और बुरे चरित्रके आज के उदाहरण :

                (१)   एक यूनिवर्सिटी अंग्रेजी का परीक्षा पत्र देनेसे पहले एक विद्यार्थी जवाब लिखना सारू कर देता  है। (२)  बिहार परीक्षा केंद्र का दृश्य  , खिड़कियों पर चढ़े चोरी करने वाले (३) अभी अभी नीट पेपर लीक घटन (४)    एक जज का निवेदन कि न्यायतंत्र भी रिश्वत से बाहर नहीं। (५)  जेसिका लाल मॉडल की हत्या युवा का चरित्र देखाता है ,(६)   दिल्ली में हुआ निर्भया रेप (७)    दिल्ली आंदोलन के दृश्य , (८)  डॉक्टर शरद ठाकुर का अनुभव बस me छोड़के कृत्य और लोगों की सहानुभूति डॉक्टर है सुनके बदली।


         चरित्र निर्माण में क्या चाहिए? : एक दिनका विषय नहीं, सातत्य का विषय है, संस्कार का परिणाम: (1)-  पूर्व जन्म  (2) माता-पिता और परिवार  (3)  समाज , (4)- राष्ट्रीय चिंतन  (5)- शिक्षा व्यवस्था (6)   निरंतर अभ्यास चरित्र बनता है 

  चरित्र निर्माण में जरूरी बाते

1. सत्य  और ईमानदारी     2. संयम और आत्म नियंत्रण. 3  सकारात्मक के विचार और संगति , 4.दायित्व और कर्तव्य निष्ठा 

5. विनम्रता और सनमान ,     6. दृढ़ता और संहिता 

       

(१) सत्य निष्ठा ईमानदारी :

 Truth and Honesty:    विचार ,  बातें ,  कार्य ,  आचरण ,   अंधेरे में भी निष्ठा रखना

            * सत्यम वद: युधिष्ठिर का प्रसंग ,  * विनोबा और भिखारी 

      (२) संयम और आत्म नियंत्रण (Self control and Discipline) :   इंद्रिय निग्रह ,  इच्छा क्रोध आवेग (FIR) , भोजन  ( उपवासी कृष्णा ,ऋषि और शिष्य , बुद्ध और गणिका )

           अनुशासन सेल्फ डिसिप्लिन ,  समय का पालन , नियम का पाा  पालन( भूटान का ट्रैफिक का उदाहरण )

       (३) सकारात्मक विचार और संगति (positive thoughts & Good   company ) :   सद्भावना ,  दया करुणा ,  सहानुभूति 

             (गीत : रात्रिदेव शिबी दधीचि) . अच्छी संगति: माहौलका परिणाम, संग जैसा रंग, स्वभाव बदल ( ऊदा कृष्ण और कंस)

       (४) दायित्व और कर्तव्य निष्ठा( Responsibility and duty).:  जिम्मेदारी निभाने उदाहरण : बाजीप्रभु देशपांडे ,* आऋणी और बारिश की कहानी .  गलती स्वीकारना और सीखना .  कर्तव्य : समाज ,परिवार,. देश के लिए सैन्य शक्ति 

       (५) विनम्रता और सम्मान ( humility and respect) :  ज्ञान ,  सफलता ,  मिलने पर अहंकार नहीं , EGO नहीं ( उदाहरण : पेड़ खजूर के और आम के, नदी किनारे  घास ).बड़ों का आदर ,  छोटे को प्यार ,  जीव दया  ( उदाहरण संत एकनाथ नामदेव )

         (६) दृढ़ता और साहस {Resilience and Courage) :   कठिनाई और असफलता में झुकना नहीं  (मकड़ी )

          Not  the failure but low aim is crime.      युद्व के समय बांग्लादेश  संघ का स्वयंसेवक :,नैतिक साहस ,  Moral courage उदाहरण इमरजेंसी के दौरान 


शिक्षा की में अवधारणामे चरित्र का: Ÿ परिवार से शिक्षा ,समाज शिक्षा , शिक्षा संस्थानों से शिक्षा, सामाजिक संस्थाओं से शिक्षा 

1. परिवार से चरित्र : निर्माण  ( गाय ,कुत्ता को रोटी देना ,भिक्षुक को भोजन  , जन्मदिन पर दान,  बड़े लोग को मानवंदना यह सब बचपने दिखाते है. हमारा  घर ही एक विद्यालय है। )

2. समाज अडोश पड़ोस से और व्यवसाय स्थल से औपचारिक और अनौपचारिकता पथ शिखना मिलता है।

3. सामाजिक संस्थाएं :     मठ मंदिर आश्रम ,  सामाजिक संगठन ,  मंडली और उत्सव की व्यवस्था में गुण मिलता है। 

4. शिक्षा संस्थान :   शिशु मंदिर से लेकर माध्यमिक उच्चतर माध्यमिक विश्वविद्यालय यह मुख्य केंद्र माने जाते है।


शिक्षा का विशेष विचार: Ÿ शिक्षा सिर्फ पुस्तक पढ़ने से नहीं आती।,Ÿ परीक्षा उत्तीर्ण होने से नहीं ,सिर्फ अटेंडेंस से नहीं , Desertstion से नहीं आती।

Ÿ शिक्षा आजीविका का या गृहस्थीचलाने का सिर्फ साधन नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य अतःमन को तरासना ,  योग्य बनाना, संवेदनशील बनाना,चरित्रवान बनाना है। ( उदाहरण कविता wanted a man, man with M, Digenis and  Pigmi )


चरित्र का महत्व और शिक्षा:    ज्ञान सिर्फ डिग्री पाना, इनफॉरमेशनl एकत्र करना नहीं है वह Wisdom , नैतिकता,  मूल्य निर्माण चरित्र के लिए जरूरी है।

Ÿ It is said that When skill and technology increases there are all chances moral values and ethics decreases  (उदाहरण 

ट्विन टावर उड़ाने वाले आतंकवादी शिक्षित थे ,  पुणे एनेस्थेटिस्ट डॉक्टर और अराष्ट्रीय कार्य ,  दिल्ली डॉक्टर आतंकवादी पकड़े गए)

Ÿ अगाध ज्ञान वाला व्यक्ति भी समाज व्यक्ति को नुकसान कर सकता है लेकिन अगर चरित्रवान है तो समाज के लिए कल्याणकारी बनता है।

Ÿ जापान पर हिरोशिमा और नागासाकी पर लगाए गए परमाणु बम के रचयिता J robot opnehimer रोबोट ओपन हैमर ने इस शक्ति को गीता में बताए गए विश्वरूप दर्शन के संहारक रूप का चित्र बताया और कहा कि यह बम बनाकर मैने दुनिया का नुकसान किया है। वह अफसोस उन्होंने व्यक्त किया: अल्बर्ट आइंस्टीन से और राष्ट्रपति  ट्रूमैन  से भी पास।

Ÿ ऐसे समाज के कल्याणकारी चीज कभी समाज के नुकसान कारक भी बन सकती है इसलिए चरित्र का बहुत महत्व है ।

चरित्र भारतीय शिक्षा और आधुनिक शिक्षा दोनों में है।

Ÿ चरित्र निर्माण शिक्षा से दोनों का आंतर संबंध है , व्यक्ति के विचार व्यवहार और दृष्टिकोण नैतिक मूल्य बनाते हैं ।

Ÿ इनके पालन से चरित्र निर्माण होता है .शिक्षा में बताना ,पढ़ना ,दिखाना और पहचान बनाना है। सही ज्ञान और चरित्र से सही गलत का निर्णय होता है।

Ÿ विवेकशीलता निर्माण हो Discrminstion power . सा विद्या या विमुक्तये -चाहिए .    अज्ञानका अंधकार दूर करें.   संकीर्णतका संकट का अंधकार दूर करें। नैतिक पतन का अंधकार दूर करें ।  शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है ।यह  केवल सूचना नहीं है ।चरित्र से ही पशु और मनुष्य में अंतर दिखता है।

महापुरुषों के कथन:  

1. स्वामी विवेकानंद हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र निर्माण हो :  मानसिक शक्ति बडे , बुद्धि का विकास हो ,    मनुष्य अपने पैरों पर खड़े रहे .I want   Man with M.I want 100 नचिकेता .   He said I want Youth with with muscles of irons and nerves of  steel which dwells a mind of ths same material as that of which the thunderbolt is made।

2.    महात्मा गांधी :  चरित्र के बिना जीना समाज के साथ महापापों में से एक है 

           (१) श्रम विहीन  संपत्ति , (२) अंतकरण विहीन आनंद , (३) नैतिकता विहीन व्यापार, (४)  मानवता विहीन  विज्ञान ,  (५) त्याग विहीन धर्म 

           (६) सिद्धांत विहीन राजनीति और यह ,   (७) सातवां चरित्र विहीन ज्ञान 

3. सर्वपल्ली राधाकृष्णन :    शिक्षा केवल तकनीकी और कौशल तक सीमित ना रहे । मनुष्यमें साथ सत्य अहिंसा और करुणा के मूल्यों का सिंचन करें।

 4. मार्टिन लूथर किंग :   सच्ची शिक्षाका उद्देश्य व्यक्तिको तीव्र बुद्धिमान के साथ शुद्ध चरित्रवान बनाना है।


व्यक्तिगत चरित्र और राष्ट्रीय चरित्र:

        दोनों का महत्व है । दोनों एक सिक्के के दो पहलू है। पृथ्वी की गति की तरह अपनी : धरी पर और सूर्य के आसपास गति वैसे ही व्यक्तिगत और राष्ट्र चरित्र का विषय है। दोनों गई बिना जीवन संभव नहीं। राष्ट्र निष्ठा का  महत्व ,   व्यक्ति से परे परिवार ,  परिवार से परे समाज से,  समाज से परे ग्राम ,  ग्राम से परे राष्ट्र है

Ÿ त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्।ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥

Ÿ व्यक्ति का व्यक्तिगत चरित्र के राष्ट्रीय चरित्र ठीक नहीं तो  राष्ट्रको पतन की ओर ले जाता है : उदाहरण डॉ बाबासाहेब आंबेडकर संविधान सभा में अंतिम भाषण चिंता व्यक्त की, स्वतंत्रता आई बार-बार गई 

         इतिहास के उदाहरण

1. सिंध पर आक्रमण , इस 712  द्वारा मोहम्मद बिन कासिम राजा दाहिर पर तब राजकोष सेनापति ने रिश्वत ली बदल गया दुश्मन के साथ चला गया।

2. पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी का युद्ध : घोरि को जयचंद ने बुलाया और  मदद की, सोलंकी राजा भी मदद की थी ।

3. छत्रपति शिवाजी महाराज:  के हिंदू पद पद साहिकी स्थापना का कार्य था लेकिन कई  मराठा सरदार, सूबेदार और राजपूत राजा साथ नहीं चलें ।राजा जयसिंह  औरंगजेब सी ओर से लड़ने आए ।

4. सिख और अंग्रेजों के संघर्ष में गुलाब सिंह निष्क्रीय रहे 

5. 1857 का स्वतंत्रता संग्राम अंग्रेजों के सामने सिख बंधु सक्रियता नहीं रही। अन्य राजा भी साथ नहीं खड़े रहे।

        उधर चरित्रवान लोग भी थे जिन्होंने अपना नुकसान सहन करते  राष्ट्र को मदद की। :  तानाजी मल्सौर, ,खंडोजी बल्लाड ,बाजी प्रभु देशपांडे । ये सब,वज्रादपि कठोरानी ( स्व के लिए कठोर),Ÿ मुद्दनी कुसुमदपि ( दूसरोकी प्रति मृदु)थे। 

National character is keystone in Arch। If it is broken everything will grumble down 

दत्तोपंत:  व्यक्तिगत चरित्र के रक्षा व्यक्तिगत है: बारिस्के सामने छाता जैसा जब   राष्ट्रीय चरित्र समाज और देश रक्षा करता है: उदाहरण छत, आकाश। राष्ट्रहित ,   राष्ट्रीय चरित्र का कार्य ,   व्यावहारिक देश भक्ति ( उड़ा पंच परिवर्तन की बातों मेंमिलता है ,  देशभक्ति से चरित्र बनता है ।राष्ट्रीय चरित्र का लोप का कारण ठीक ठीक  शिक्षा का अभाव है।   संस्कार का अभाव है। अच्छे-अच्छे उदाहरण .  स्वार्थ छोड़के अपने राष्ट्र को ज्यादा आगे लाये।

Ÿ आगे बढ़े  देश को उदाहरण दे अन्य देशों के उदाहरण 

1. जापान वित्तीय विश्व युद्ध के बाद :    दूसरेकर फिल्म की टिकट नहीं ली,  हर्षद भाई साहब का अनुभव ,    स्कूल के बच्चे के साथ बातचीत पढ़ना राष्ट्र के लिये।

2. इजरायल युद्ध के समय एक महिला का जवाब में घर कम छोड़ के सरहद पर जा रही हु।

3. इंग्लैंड लड़ाई के समय:  राशन कार्ड की लाइन कारण राशन वापिस लेना था।: जगजीवन राम का अनुभाव पेट्रोल कार्ड और टैक्सी ड्राइवर ।

4. जर्मनी डॉक्टर संजीव ओझा रोड ट्रैफिक में अनुभव :Ÿ

भ्रम भ: व्यक्तिगत चरित्र नहीं है तो चलेगा , देश हित सामाजिक में काम करते हैं ना । काली भैंस का दूध तो सफेदी है ना! 

Ÿ चरित्र के साधन भी शुद्ध ,बिना मिलावट हेतु , अशुद्ध रास्ते से आया हुआ धन राष्ट्रीय समाज को दान देना वह भी बिना चरित्र वाला है .. 

         आज समाज का बदला चरित्र : शिक्षा व्यवस्था में मिलावट : नौकरी में रिश्वत,    परीक्षा में गैर रीतियां,  माता-पिता ट्यूशन के समय एडमिशन के समय स्वार्थ की बातें ,  मुझे क्या मदद करोगे ,  पहले रिश्वत लेते थे अब भी लेते हैं बाल बच्चे के लिए,   पति-पत्नी के सामने सोने का गहना लेकिन नहीं लिया अब,? पैसे के लिया सब।कुछ जायद!  हितैषी किडनैप, रिश्वत, फ्रॉड, से भी पैसा लेना . दहेज में दूल्हा सरकारी कर्मचारी बिकते हैं। 

            शिक्षा से चरित्र निर्माण में सहायता सामाजिक संस्थान और शिक्षण संस्थाए को नुकसान सहन करने की तैयारी रखना, मन बनाना, उदाहरण देना , रोल मॉडल प्रस्तुत करना - संघ अधिकारी सरकारी कर्मचारी जो रिश्वत नहीं लेते एकत्र किया। 

Ÿ Power is never demonstrated in society unless it is misused.  Police thinks that।

Ÿ In France: Corrupt police ostracized मान सम्मान मन नहीं मिलता , लोग संबंध नहीं रखते , प्रतिष्ठा कम होती है 

Ÿ स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुसंस्कार स्वास्थ्य सेवा अस्पताल तंत्र चकता है।

Ÿ Burnad ruseell::Hold on for longer time will be respected।

Ÿ दु:शचरित्र और चरित्रवान के बीच सामाजिक स्थिति में तफावत होता है

Ÿ नथिंग मोर पॉवरफुल थन आइडियलिज्म _विक्टर युगों 

Ÿ Inevitable becomes intolerance tha moment it is perceived to be inevitable 

Ÿ राजा चरित्रवान नहीं तो ऋषि गण उन्हें दंडित करते थे बदल भी देते थे 

Ÿ अपने मीठे फल समाज उपयोगी ना हो तो उनका अर्थ नहीं( गुरुजी )खजूर के पेड़ 

Ÿ एकनाथ जी:  चरित्र निर्माण प्रथम पुरुष एकवचन है 

Ÿ बालाजी पेंढारकर का स्टूडियो जल गया राष्ट्रीयता के विचार के लिए , वो बोले कोयले की ताल शुरू करूंगा लेकिन राष्ट्रीय कार्यक्रम चालू रखे।

Ÿ आपातकाल में चरित्र का उदाहरण ,पापा जी और डॉक्टर कुकडे बाबाराव भिड़े माफी मांगकर जेल से निकलना नहीं चाहा।

           शिक्षा की अवधारणा और शिक्षा का महत्व :Ÿ साधन शुद्ध रखें ,Ÿ चरित्र साधन है लक्ष्य नहीं ,उदाहरण राम शिवाजी प्रताप ,इसके लिए नुकसान सहन करना। माता हरी नृत्य की फ्रांस की मदद की।

Ÿ सद्गुण विकृति ना हो पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी 

Ÿ अपना नुकसान भी सहन करना है (१) संभाजी पुत्र राजाराम को छुड़ाने के लिए खंडोजी बल्लाड ने अपना पुत्र बलिदान कर दिया (२) रा नवघन को  बचाने के लिए देवायत बोदर ने अपना पुत्र उगा का बलिदान दे दिया ।

Ÿ चिन् युद्ध समय साम्यवादी पार्टी वाले सरकारको तुम्हारी सेना कहते थे तब गुरु जी ने कहा हमारी सेना कहो:  युधिष्ठिर ने यक्ष के आक्रमण समय कहां हम 105 है ।

Ÿ इंदिरा गांधीन यूएनओ में अपना पक्ष रखने के लिए बाजपेईजी को भेजा ,संकीर्णता नहीं।

Ÿ यशवंत राव : हम छोटे लोग से सीखते हैं बर्तन गरम होने के बाद पानी गरम होता है

Ÿ बिहार का अकाल कांग्रेस संसद ने निधि  सहाय संघ को दी ।

Ÿ 2001 भूचाल के समय स्वयसेवकोका के चरित्र का उदाहरण

उपाय :

Ÿ IQ +SQ+ EQ = चरित्र 

Ÿ राष्ट्र भक्ति निर्माण: शिक्षा व्यावहारिक और सामाजिक दोनों 

Ÿ सत्य का पात्र स्वर्ण से ढंका होता है उपनिषद । दूर करे

Ÿ 2001 उस ट्विन टावर समय दोनों लोगों के मूल्य अलग शांति चाहनेवाले और आतंकवादी के । हम क्या चाहते है? 

Ÿ peer प्रेशर की लाइफ छोड़ें उदाहरण डॉक्टर जीवन

Ÿ टेस्टिंग का कैरेक्टर ओनली पॉसिबल stress  and strain

Ÿ विवेकानंद  I have faith in yonger modern generation 

शिक्षा व्यवस्था: : ठीक हो, चरित्र निर्माण करने वाली बने, सिस्टम ही करप्शन फ्री हो,Ÿ अगर शिक्षा व्यवस्थान ही गड़बड़ है तो क्या होगा?, Ÿ फिल्म का गीत है" चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाये, सावन जो आग लगाए तो क्यों बुझाए? बाहर ही भाग उजड़े तो कौन बचाये? 


उदाहरण (१)  राम और रावण:   राम: सत्य, धर्म, त्याग, चरित्रवान__ मर्यादा पुरुषोत्तम कहे गए।  रावण: ज्ञानी, वेदपाठी, विद्वान, शक्तिशाली लेकिन चरित्रहीन होने से पतन हुआ।     बिना चरित्र ज्ञान नुकसान कारी है।

                      (२) डॉ एपीजी कलाम: वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, सादगी युक्त आजीवन रहे शिक्षक तारिक विषय हुए।


Ÿसरसंघचालक मोहनजी: शिक्षक भूषण समारोह:   कहा शिक्षक का काम है विद्या और संस्कार देना ,   शिक्षक को माता-पिता बनना पड़ेगा। मातापिताको शिक्षक ,। व्यवस्था से  परिणाम आता है ,   चरित्र का पाठ पढ़ना पड़ेगा ।  नरेंद्र मोदी जब गुजरात में थे तब उन्होंने व्याख्यान " आचार्य धर्म"     कहा था  विषय के साथ धर्म को जोड़ना चाहिए ।

         धर्म की शिक्षा बहुत महत्व की है :  धर्म यानी कर्तव्य जोड़ना निर्माण करना,      इसलिए हमारे यहां धर्मशाला, धर्मदाका दवा खाना ,धर्मका भाई  ,  धर्

का कांटा ऐसा रहता था। शिक्षा व्यवस्था में क्या-क्या करना चाहिए क्या बदल क्या नया निर्माण करना चाहिए और क्यों करना चाहिए

Ÿ शिक्षा  राष्ट्र का भविष्य शिक्षा: Ÿ आज का विद्यार्थी कल का नागरिक ,हमारे देश को धर्मनिरपेक्ष बनाया गया 

Ÿ धर्म सबको जोड़ता , कर्तव्य ,गुण ,Ÿ धर्मनिरपेक्षता से और  अधार्मिकता और धर्मवीमुखता ,भारत धर्म की भूमि है हमारे यहां अनेक जीवन आदर्श खड़ा हुए हमारे ,आदर्श के शास्त्र पढ़ये. उदाहरण सबके सामने रखे. एथिक्स मोरालिटी हर विषय के साथ जोडे 

Ÿ संस्कृती का मूल्य सीखाये, स्वकी  कृति उत्पन्न हो,Ÿ विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार भी 

Ÿ हमारे यहां पाठ्यक्रम बने निश्चित ,समय अवधि का समय, प्रार्थना में चिंतन समय में कहानियों में संवाद में प्रबोधन में 

Ÿ विषय हो राष्ट्रवाद और ध्येयवाद : उदाहरण इसराइल , सिर्फ क्रियकांड नहीं धर्म का सच्ची बात 

Ÿ धर्म बिना शिक्षा जड़ के बिना वृक्ष,Ÿ विवेकानंद कहते थे religion is menifeststion of divinity already lying within man

Ÿ उपयोगितावाद को चरित्र से अलग करे ,Ÿ अंतिम लक्ष्य मोक्ष है जो सुख और आनंद का ही रूप है वह चरित्र के बिना संभव नहीं 

Ÿ चरित्र के उदाहरण युधिष्ठिर ,अध्यापक प्रशिक्षण ले ,Ÿ पाठ्यक्रम का निर्माण हो उदाहरण" आवरण"  कन्नड़ भैरवाजीकी कहानी।

Ÿ वातावरण बनाएं .पंचकोशिका शिक्षण 

Ÿ श्री अरविंद के (१) सुझाव दे विद्यार्थियों को सुझाव दें (२)जबरदस्ती नहीं (३)विद्यार्थी स्वयं प्रयास करें (४)वर्तमान से भविष्य की ओर  ले जाये. शिक्षा की अवधारणा के बारे में महापुरुषों ने क्या कहा है


Ÿ विनोबा भावे शास्त्र का उपयोग करे क्योंकि कल के अनुभवी से गुजरे है।उदाहरण विष्णु सहस्त्रनाम . Ÿ पूजनीय गुरूजी समस्या का उपाय चरित्र से .Ÿ डॉ कलlम।  स्पिरिचुअलिसए थे रिलिजन एंड नेशनलाइज्ड थे मैन .                   विषय के साथ चरित्र जगदीश चंद्र बोस डॉ पी सी रॉय .Ÿ अनौपचारिक प्रयास तो  कुछ औपचारिक ,Ÿ सिद्धांत की पुस्तक भी .Ÿ धर्म के तत्व की बात सत्य , अक्रुद्धि , धृति, क्षमा , निग्रह , ईश्वर प्रणिधान सोच , संतोष वगैरा. पंच निष्ठा निर्माण हो (१)राष्ट्र निष्ठा (२)बंधुता की निष्ठा (३)श्रम निष्ठा (४)समय निष्ठा और (५)सत्य निष्ठा .

Ÿ चीन में कहावत है " खेत ठीक करना है 3 साल लगेंगे राष्ट्र के लिए बचपन से शुरू करें "

Ÿ डॉ  जाकिरहुसेन सैन का हॉस्टल में खाने के समय उदाहरण ।

Ÿ कोठारी आयोग ने कहा है तो " फ्यूचर ऑफ इंडिया इस बीइंग शेप्ड इन हेर क्लासरूम "

Ÿ अमेरिका मे जेफरसन  से ने कहा आपको लोग कैसे याद रखेंगे "उन्होंने कहा राष्ट्रपति की तरह नहीं लेकिन फाउंडर ऑफ यूनिवर्सिटी वर्जीनिया की ओर से "

Ÿ शिक्षक पर योग्य खर्च भी करना जरूरी है 

Ÿ एसपी चौहान कमेटी धर्म की शिक्षा चलाएं लेकिन उससे भगवान करण का लेबल लगता है 

Ÿ शिक्षा में परिवर्तन चाहिए गलीपति से दिल्ली पति तक कहते हैं लेकिन लेगा कौन ? अपनाएगा कौन? 

Ÿ डॉक्टर कलाम ने तेजसवि मन पुस्तक में कहा है " हु आर द रोल मेडल एट द होम फादर मदर,सी एंड इट्स स्कूल द टीचर " 

Ÿ लालटेन का ग्लास साफ करे

Ÿ गोल्डन बुद्ध को मिट्टी निकाल कर बाहर ले 

Ÿ डेक्कन हेराल्ड ने कहा है " who is really educated? " सरकारी कर्मचारी और पक्षी का घोंसला घटना।लो


Ÿ अमेरिका में रहे चीन के एंबेसडर हुई ने कहा भारत ने बिना सैनिक भेजे चिन् पर वर्षों से अपना प्रभावित निर्माण किया वह चरित्रवान संस्कृति रक्षक लोगों से।

आज का युग जी विज्ञान का युग है समृद्धि और जानकारी आती है डिजिटाइजेशन हुआ है

Ÿ नैतिक शिक्षा  Value bases education दिखता नहीं : सामाजिक समरसता आय,अपराध बोध और हिंसा कम हो 

Ÿ वैश्विक नागरिकता Empathy एंपैथी ,सकारात्मक नेतृत्व :  सत्य संयम और विचारणीय

Ÿ शॉर्टकट नहीं , मानसिक स्वास्थ्य .आत्म नियंत्रण और धैर्य और कंसंट्रेशन 

Ÿ सूचना इनफॉरमेशन से ज्ञान मिलता है चरित्र नहीं बनता  उड़ा गूगल और ए से इनफॉरमेशन मिलती है विजडम नहीं 

Ÿ उदाहरण परीक्षा के समय विद्यार्थी गूगल गुरु के पास सुसाइड के सो रास्ते 

Ÿ निर्मसम निरुत्साहम निर्विर्यम मरीनंदनम _ वेद व्यास 

Ÿ स्वदेशी पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते 

Ÿ सज्जन ज्यादा संगठित नहीं है दुर्जन है

Ÿ रबिन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा " birth of every child shows God has not lost faith in mankind 

Ÿ विदेश का अंधा अनुकरण छोड़ना पड़ेगा 

Ÿ Walkism, कल्चरल hagymony 

Ÿ अमेरिका में विद्यार्थी सहनिवास चाहते हैं कंडोम बेचना पड़ता है,  जवाहर यूनिवर्सिटी में भी मांग हुई । मुंबई की IIT में कॉमन वॉशरूम की बात

पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन के कुछ प्रसंग

1. कोलकाता में उनको डॉक्टरेट की पदवी देने को कहा गया। उन्होंने कहा मैं यह गौरव नहीं चाहता। मैं बनारस का पंडित हूं पंडित जी बना रहना चाहता हूं क्या मुझे मेरी सनातन की उपाधि छीन लेना चाहते हो ? 

2. वृद्ध होने पर भी मालवीय जी वायसराय के वरिष्ठ काउंसिलर रहते थे वायसराय ने कहा कि हिट मजेस्टिक सरकार उनको 'सर ' की उपाधि  देना 

चाहती है तभी मालवीय जी ने कहा मुझे पंडित रहने दीजिए  सर नहीं

3. काशि        

ज्ञान आपके पंख है 

के पंडित सभा ने जी पंडित राज की उपाधि देने को तय किया तब उन्होंने हंसते हुए मना कर दिया और कहा मुझे सिर्फ पंडित रहने दो महा पंडित पंडित राज्य वैसा का नंदन हो जाते ह.       लेकिन चरित्र दिशा सूचक है .   

       कहानी याद कीजिए एलिसन वंडरलैंड की .       हम केवल प्रोफेशनल ना बने चरित्रवान बन 

      कथा कुमारील भट्ट और शहजादी .      यज्ञ में स्वर्ण मिलन


विद्या ददाती विन्यम, विनियाद दयाती  पात्रताम 

पात्रताम धन मापनोती, धनाद धर्म तत: सुखम

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