बुलढाणा संघ कार्यालय मंगल प्रवेश

दिनांक २६.८.२०२६



आज बुलढाणामे संघ स्वंयसेवकोके लिए उत्सवका दिन, आनंद के दिन है कयुकी कार्यलय लोकार्पण है

• संघ कार्यकी व्यवस्थांके लिए कार्यालय

• संघ।का कार्य: संज्ञके लिए नहीं है

• संघ का काम समाज के लिए है 

        समाज का काम है 

        जो काम समाज को करना चाहिए वह संघने शुरू किया है 

        जो काम व्यक्ति परिवार के लिए 

                    समाज अपने लिए और 

                    समाज देश के लिए करता है 

                    वह काम संघ ने शुरू किया 

• जब व्यक्ति समाज और परिवार राष्ट्र के लिए काम करता है तो राष्ट्र और समाज दोनों सुखी सुरक्षित और प्रतिष्ठित होती है 

• RSS is evolution of the life mission of Hindu nation( दादाराव परमार्थ)

• इतिहास है कि

              हमारा देश 2000 साल तक गुलामी में रहा 

             आत्मविश्वमूर्ति ,स्वार्थ भाव और असंगठितता के कारण 

             कर्तव्य विमुक्त हुए 

             विदेशी आक्रमण आए 

             गुलामी का कल चला 

             समाज निर्मल्य हो गया 

             इसको ठीक करना चाहिए 

             लेकिन कौन करेगा ? तो यह काम बहोत  महापुरुषों किया

             वह पंक्तिमे डॉ हेडगेवार्न भी संघ के माध्यम से किया

             शुरू करने का दायित्व संघ ने अपने पर लिया 

• संघ एक मॉडल है लेकिन यह मॉडल समाज में डिस्पर्स होना है 

            यह संघ का कार्य स्टार्टर है चाबी है किक है 

            जैसे व्हीकल में उपयोग होता है लेकिन 

            बाद में वहां अपनी गति में चलना लगता है 

            समाज के लिए भी यही अपेक्षित है 

 

• यह कार्य हिंदू संगठन आता है 

            सैमुअल हंटिंगटन ने कहा था who are we? 

            पुत्रवत सामाजिक कार्य

            भारत माता भक्ति और समाज प्रेम और संगठन भाव निर्माण 

            हो देश के सभी प्रश्नों का उत्तर एक है हम सब हिंदू है 

• संघ के लिए कार्यालय  क्यों ? 

        कार्य तो अत्र तत्र सर्वत्र है 

        लेकिन एक जगह बैठकर देखना संभालना मूल्यांकन करना ऐसी कोई                      एक जगह भी चाहिए 

        कार्यालय कार्यकर्ता को मिलने का स्थान है 

        कार्यालय संघ कार्य का प्रेरणा स्थान है 

        कार्यालय सिर्फ भवन नहीं है 

       कार्यालय में  संघकार्य का अनुभव होता है 

       कार्यालय में कागज पत्र रखने की सिर्फ जगह नहीं है या कार्यकर्ता को                     रहने की जगह नहीं है संघ का एक धनी भूत अनुभव का स्थान है

       यहां क्या अनुभव होना चाहिए कि समाज और राष्ट्र एक हो जाए 

       यह अनुभव हमें दिखाना चाहिए 

       हमें कार्यालय से गुण निर्माण की भी आवश्यकता है सत्य तपस्या करुणा                   सुचिता

• संघ का कार्यालय यांत्रिक चीजें या टेक्नोलॉजी से काम लेने का स्थान नहीं है 

• यहां सिर्फ सूचना देने लेने का स्थान नहीं होता है ,यहां सिर्फ चीजों का पुस्तकों का भंडार नहीं होता है, या गणवेश लेने की सिर्फ जगह नहीं होती

• यहां एक भावनात्मक सार्थक वातावरण 

• बाहर से तो देखा है तो ऐसा लगता है  ऑफिस है कभी-कभी हॉस्टल है या छोटा सा घर ऐसा लगता है 

• लेकिन यहां से सूचना आती है और सूचना जाती है लेकिन उनके साथ संघ का भाव जाता है 

• यहां संघका भंडार और गणवेश की बिक्री तो होती है लेकिन उनके साथ संघ का भाव जाता है 

 

• संघ कार्यालय ही संघ की पहचान बन जाता है 

• कायदे की भाषा में संघ बॉडी आफ इंडिविजुअल कहा जाता है टेक्निकल टर्म में ठीक है लेकिन यहां जीवंतता होती है ,जीवंत वातावरण होता है इनकी अनुभूति है 

• यह करने वाले कौन होते हैं, यहां आने वाले कार्यकर्ता ,प्रचारक ,पूर्ण कालीन ,बाहर से आने वाले स्वयसेवक , शुभेच्छक, दाता,भवन में काम करने वाले कारीगर सभी की यही भावना रहती है

• कार्यालय में काम करने वाले सब लोग भक्ति भाव से काम करते हैं यहां सफाई करने वाले हो, रसोई बनाने वाला हो, या चौकीदार 

• उदाहरण रसोई बनाने वाला और सारथी।

• और आने वाले के लिए अतिथि भाव भी 

• आज समाज में क्षमता बढी है स्वयंसेवकों की भी आर्थिक स्थिति अच्छी हुई है तो ऐसे काम में थोड़ी सरलता रहती है 

• संघ कार्यालय के काम के लिए निधि भी स्वयं सेवक देते है।

• समाज का काम है सेवा का काम है तो समाज का सहयोग अवश्य देते है

• पंडित मदन मोहन मालवीय ने डॉक्टर साहेबको को मिले थे और कहा था की संघ के लिए कोई आर्थिक जरूरत है जो मुझे कहना है मैं शाही भिखारी हूं ।तब उनका जवाब था हमें आपका आशीर्वाद चाहिए 

• अभी कार्यालय अच्छे भी बनते हैं ।पहले एक समाचार कार्यालय की जरूरत ही नहीं होती थी क्योंकि काम छोटा था ।कार्यकर्ता के घर से ही हो जाता है ।अभी काम बढ़ा है,व्यवस्था भी ज्यादा बढ़ी है ।

• तो कुछ व्यवस्था ही कर परिश्रम और सादगी हो।लग्जरी की आवश्यकता नहीं है ।जरूर पूर्ण होनी चाहिए ।बाहर से आने वाले को ठीक व्यवस्था मिलनी चाहिए 

• उदाहरण नागपुर तृतीय वर्ष में मोरारजी देसाई के पुत्रका  आगमन।

• जैसे मकान बनाने लेकर नगर पालिका के मानांक होते हैं विशेष संघ के भी कार्यालय के लिए कुछ  रहते हैं 

• एक सबसे ज्यादा महत्व होता है संभव का जीवन परिचय के अनुसार बदल होता है बातें छोटी-छोटी होती है लेकिन बाहर से वह दिखने में कैसी है इसका महत्व है 

 

• अभी संघ बड़ा वट वृक्ष बना है।  गतिविधि व्यवस्था भी बढ़ी है तो बाहर का रूप और अंदर करो दोनों एक ही होना चाहिए 

• कार्यालय भवन एक क्रियापद है । क्रिया अवश्य हो।

• प्रभावभी नहीं और अभाव भी नहीं।शंका कार्यालय में हो और प्रभाव भी ना हो कार्य पहले आता है।

• मोरोपण जी ने राजकोट में कहा था अलाय हो गया कार्य हो।

• आज संघ की दशा बदली है लेकिन दिशा नहीं 

• कार्यालय जीवन स्थान बन रहे अतिथि देवो की भावना बनती है

• व्यवस्थितता बनी रहे एक मंदिर जैसा बन 

• स्वदेशी का भाव बना रहे और 

• वन उपवन से नंदनवन बने

• यही एक महत्व है


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